नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली को लेकर देशभर में उठे विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। अपने इस्तीफे के साथ जारी संदेश में प्रधान ने कहा कि यह फैसला किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा या राजनीतिक दबाव का परिणाम नहीं है, बल्कि छात्रों के हित और देश की शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में जो घटनाक्रम सामने आए, उन्होंने उन्हें गहराई से विचलित किया और इसी कारण उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने का निर्णय लिया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के तुरंत बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “नरेंद्र मोदी भारत का अतीत हैं। अतीत कभी भविष्य से नहीं लड़ सकता।” पार्टी ने इसे युवाओं के संघर्ष की जीत बताते हुए सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कदम बहुत पहले उठाया जाना चाहिए था। उन्होंने इस्तीफे को “एक दिन देर और एक डॉलर कम” बताते हुए कहा कि सरकार ने काफी देर से कार्रवाई की है। खेड़ा ने कहा कि अंततः धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना पड़ा, लेकिन अगर सरकार समय रहते निर्णय लेती तो देशभर में छात्रों का आक्रोश और विरोध प्रदर्शन इस स्तर तक नहीं पहुंचते। उन्होंने कहा कि यह फैसला सरकार की नैतिक जिम्मेदारी से अधिक जनदबाव का परिणाम प्रतीत होता है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इसे देश के युवाओं और लोकतांत्रिक संघर्ष की बड़ी जीत करार दिया। उन्होंने एक्स पर लिखा कि करोड़ों छात्रों की आवाज आखिरकार सत्ता के गलियारों तक पहुंच गई। खड़गे ने कहा कि यह केवल एक मंत्री के इस्तीफे का मामला नहीं है, बल्कि उन लाखों छात्रों की जीत है जिन्होंने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर लगातार संघर्ष किया। उन्होंने सरकार से छात्रों और उनके परिवारों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। साथ ही, प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की भी मांग की।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अंततः सरकार को अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन यह निर्णय बहुत पहले लिया जा सकता था। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते जिम्मेदारी तय कर ली जाती तो देशभर में छात्रों को सड़कों पर उतरने की जरूरत नहीं पड़ती और कई स्थानों पर हुए तनावपूर्ण हालात से भी बचा जा सकता था। उनके अनुसार, सरकार बढ़ते जनदबाव के कारण शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने के लिए मजबूर हुई।
नीट यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किए। विभिन्न छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई। कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया।
हालांकि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि केवल इस्तीफा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों का मानना है कि सरकार को परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, पारदर्शी तंत्र विकसित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। छात्रों और अभिभावकों की भी यही मांग है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता दोबारा स्थापित हो सके।
फिलहाल प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सरकार की जवाबदेही को लेकर राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना रह सकता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार नया शिक्षा मंत्री किसे बनाती है और परीक्षा सुधारों को लेकर आगे क्या कदम उठाती है।
