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पहली बार दिल्ली विधानसभा में हिंदू नव वर्ष पर होगा भव्य आयोजन; 1,500 से ज्यादा लोगों को मिला न्योता

दिल्ली विधानसभा में पहली बार हिंदू नव वर्ष के अवसर पर सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर और कैलासा बैंड की संगीतमय प्रस्तुति होगी। विधानसभा को विशेष रूप से पुष्पों से सजाया जाएगा और 1500 से अधिक लोगों को आमंत्रित किया गया है। आगे विस्तार से पढ़िए और क्या-क्या तैयारी की गई है।

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यमुना आरती से कामकाज की औपचारिक शुरुआत के साथ अब भाजपा सरकार विधानसभा में सांस्कृतिक नवजागरण का नया अध्याय लिखने जा रही है। पहली बार विधानसभा के लान में हिंदू नव वर्ष को हर्षोउल्लास से मनाते हुए सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया है, जिसमें प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर एवं कैलासा बैंड की संगीतमय प्रस्तुति होगी।

यह उत्सव चैत्र शुक्ल प्रतिपदा नव संवत्सर 2082 के शुभारंभ अवसर पर 30 मार्च को है। जिसके लिए विधानसभा को भी विशेष रूप से पुष्प से सजाया जाएगा। साथ ही इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनने के लिए 1,500 से अधिक लोगों को आमंत्रित भी किया गया है।

हिंदू नव वर्ष की दी जाएगी बधाई 

दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि यह न सिर्फ दिल्ली विधानसभा में बल्कि देश की किसी अन्य विधानसभा में नव वर्ष पर सांस्कृतिक आयोजन का पहला अवसर है। आयोजन में रोली और चंदन से अतिथियों को स्वागत करते हुए उन्हें हिंदू नव वर्ष की बधाई दी जाएगी।

संगीतमय संध्या की मुख्य अतिथि रेखा गुप्ता और विशिष्ट अतिथि दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट व दिल्ली के कला, संस्कृति और भाषा विभाग के मंत्री कपिल मिश्रा होंगे।

समाज से जुड़े विभिन्न लोगों को किया जाएगा आमंत्रित

आमंत्रित लोगों में दिल्ली के सभी सातों लोकसभा सदस्य तथा तीन राज्यसभा सदस्यों के साथ सभी विभागों के प्रमुख भी रहेंगे। साथ ही समाज से जुड़े विभिन्न लोगों को भी आमंत्रित किया जाएगा। इसके पूर्व 20 फरवरी को शपथ ग्रहण के बाद रेखा गुप्ता की सरकार ने पूरी कैबिनेट के साथ कामकाज की शुरुआत कश्मीरी गेट स्थित वासुदेव घाट पर यमुना की आरती से की थी।

विजेंद्र गुप्ता ने क्या कहा?

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, हिंदू नववर्ष का पावन प्रारंभ, नव ऊर्जा और उमंग का संदेश लाता है। यह दिन प्रकृति के पुनर्जनन और जीवन के नए अध्याय का प्रतीक है। सूर्य की प्रथम किरण के साथ आशा जागती है और संकल्पों को बल मिलता है। यह पर्व हमें अतीत को संजोते हुए भविष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है।

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