जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है। इसी बीच केंद्र सरकार ने देशभर में युद्ध जैसी स्थिति के लिए तैयारियों को तेज करते हुए 7 मई को 244 जिलों में मॉक ड्रिल आयोजित करने का निर्देश दिया है। इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता को परखना है।
दिल्ली पुलिस ने भी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अपने मुख्यालय पर लॉन्ग रेंज एकॉस्टिक डिवाइस (LRAD) सिस्टम तैनात कर दिया है। यह एक ध्वनि-आधारित उपकरण है जो 500 मीटर से लेकर एक किलोमीटर से अधिक दूरी तक तेज आवाज़ में चेतावनी संदेश भेज सकता है। अचानक हमले या आपात स्थिति में यह सिस्टम सायरन की तरह काम करता है, जिससे भीड़ को तितर-बितर किया जा सकता है और लोगों को तुरंत आवश्यक निर्देश दिए जा सकते हैं। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों को इस सिस्टम का प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
मॉक ड्रिल के तहत देश के अलग-अलग राज्यों के 244 जिलों में सुरक्षा बल, प्रशासनिक अधिकारी, नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक और छात्र शामिल होकर युद्धकालीन स्थिति का अभ्यास करेंगे। इनमें जम्मू-कश्मीर के कई संवेदनशील जिले जैसे अनंतनाग, श्रीनगर, पुंछ, कुपवाड़ा, बारामूला आदि शामिल हैं। इसके अलावा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, पंजाब, ओडिशा, बिहार, असम, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, मणिपुर, छत्तीसगढ़, लक्षद्वीप समेत देश के कई अन्य हिस्सों में भी मॉक ड्रिल होगी।
दिल्ली में सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। पुलिस ने दिन-रात गश्त बढ़ा दी है और संवेदनशील इलाकों में बम निरोधक दस्ते तैनात कर दिए गए हैं। हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर भी अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है। डीसीपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी लगातार सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं और आवश्यक निर्देश जारी कर रहे हैं।
यह मॉक ड्रिल न केवल सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी को मजबूत करेगी, बल्कि नागरिकों को भी आपातकालीन स्थिति में सही ढंग से प्रतिक्रिया करने के लिए प्रशिक्षित करेगी। LRAD सिस्टम जैसे आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल से आपातकालीन संदेश और चेतावनी तेजी से और प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाई जा सकेगी, जिससे हमले या संकट की स्थिति में नुकसान को कम किया जा सकेगा।
इस तरह की तैयारियां भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

