राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर सोमवार (20 जुलाई) को राजस्थान हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होगी। इस सुनवाई में राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग चुनाव की तैयारियों, ओबीसी सर्वे और आरक्षण प्रक्रिया की मौजूदा स्थिति पर अदालत को विस्तृत जानकारी देंगे।
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार हाईकोर्ट के समक्ष पंचायत और निकाय चुनाव 15 अगस्त से 15 नवंबर 2026 के बीच कराने का प्रस्तावित रोडमैप पेश कर सकती है। हालांकि, चुनाव कार्यक्रम ओबीसी सर्वे रिपोर्ट और आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम रूप ले सकेगा।
बताया जा रहा है कि ओबीसी आयोग अपनी रिपोर्ट 14 अगस्त तक सरकार को सौंप सकता है। इसके बाद वार्डों के आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग को एससी, एसटी, ओबीसी और महिला आरक्षित वार्डों की अंतिम सूची मिलेगी, जिसके आधार पर चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।
इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट पहले भी चुनाव में हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जता चुका है। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग से पूछा था कि आरक्षण की लॉटरी कौन निकालेगा और यदि अदालत के आदेशों का पालन नहीं हुआ तो किस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि संबंधित एजेंसियां समय पर चुनाव कराने में विफल रहती हैं, तो अदालत चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने के लिए न्यायिक अधिकारी नियुक्त करने पर भी विचार कर सकती है।
हाईकोर्ट ने सोमवार की सुनवाई में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सभी संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत मौजूदगी के निर्देश भी दिए हैं, ताकि चुनाव में हो रही देरी के कारणों और आगे की कार्ययोजना पर स्पष्ट जवाब मिल सके।
अब तक की प्रमुख समयरेखा
- 18 अगस्त 2025: हाईकोर्ट ने समय पर चुनाव कराना राज्य निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी बताया।
- 20 सितंबर 2025: निर्वाचन आयोग को समय पर चुनाव कराने के निर्देश।
- 14 नवंबर 2025: 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने का आदेश।
- दिसंबर 2025: राज्य सरकार ने समय पर चुनाव कराने का आश्वासन (अंडरटेकिंग) दिया।
- 22 मई 2026: हाईकोर्ट ने सभी पंचायत और निकाय चुनाव 31 जुलाई 2026 तक कराने का निर्देश दिया।
अब सोमवार की सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। अदालत में सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और ओबीसी आयोग की ओर से पेश किए जाने वाले जवाब से यह तय होगा कि राजस्थान में पंचायत और शहरी निकाय चुनाव किस समयसीमा में कराए जाएंगे और हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन किस प्रकार सुनिश्चित किया जाएगा।
