SIR विवाद: INDIA गठबंधन का चौथे दिन भी प्रदर्शन, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की कोशिश; CEC के इस्तीफे की मांग तेज

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नई दिल्ली – मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी INDIA गठबंधन का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को प्रदर्शन के चौथे दिन विपक्षी सांसद आगे की रणनीति तैयार करने के लिए बैठक करेंगे। इसके साथ ही गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय मांगा है। हालांकि, फिलहाल राष्ट्रपति भवन की ओर से मुलाकात का समय तय होने की जानकारी सामने नहीं आई है।

विपक्ष की योजना राष्ट्रपति के समक्ष मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़ी अपनी चिंताएं रखने की है। इस सिलसिले में करीब 10 नेताओं का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति भवन जा सकता है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी भी दिल्ली पहुंच गई हैं। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव से संपर्क कर उन्हें दिल्ली बुलाया है।

दोपहर 3 बजे संसद के सेंट्रल हॉल में बैठक

राष्ट्रपति से मुलाकात की कोशिश से पहले INDIA गठबंधन के सांसद दोपहर 3 बजे संसद के सेंट्रल हॉल में बैठक करेंगे। इसमें आगे की रणनीति और विरोध प्रदर्शन के अगले चरण पर चर्चा होगी।

समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, यदि राष्ट्रपति भवन से मुलाकात का समय नहीं मिलता है, तो विपक्ष अन्य विकल्पों पर विचार कर सकता है। संभावित विरोध स्थलों में सेवा तीर्थ, राष्ट्रपति भवन, उपराष्ट्रपति आवास और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास के आसपास के क्षेत्र शामिल बताए गए हैं। हालांकि, इन स्थानों पर प्रदर्शन का अंतिम निर्णय होने की पुष्टि नहीं हुई है।

SIR और चुनाव आयोग को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?

विपक्ष का विरोध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया, उसकी पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर है। INDIA गठबंधन के नेताओं का आरोप है कि SIR से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष ने प्रक्रिया को लेकर अधिक पारदर्शिता और पहले से मौजूद मतदाता सूची के इस्तेमाल की मांग उठाई है।

विपक्ष का आक्रामक रुख उस रिपोर्ट के बाद और तेज हुआ, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में मतदाता सूची के SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आधिकारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इन दावों और आपत्तियों के संदर्भ को लेकर चुनाव आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण रहेगा।

आठ दिनों से जारी विरोध की समयरेखा

विपक्षी दलों ने अक्टूबर की शुरुआत से अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन किए हैं। 2 अक्टूबर को दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने प्रदर्शन किया, जबकि मुंबई में भी विरोध कार्यक्रम हुआ। 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शन किया। इसके बाद 4 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई गई और 5 अक्टूबर को मुंबई में ठाकरे भाइयों के नेतृत्व में मोर्चा निकाला गया।

6 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के सांसदों ने संसद भवन से निर्वाचन आयोग के कार्यालय तक मार्च किया और आकाशवाणी भवन में धरना दिया। 7 अक्टूबर को कांग्रेस ने लंच के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया, जबकि 8 अक्टूबर को राजघाट पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किया गया। पटना और लखनऊ समेत अन्य शहरों में भी प्रदर्शन हुए।

विपक्ष की पांच प्रमुख मांगें

INDIA गठबंधन ने अपनी मुहिम के तहत पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, मतदाता सूची में पारदर्शिता, SIR से पहले की मतदाता सूची का इस्तेमाल, EVM के स्थान पर बैलेट पेपर से चुनाव कराने और चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करने की मांग शामिल है।

विपक्ष का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए इन मुद्दों पर जवाब जरूरी है। हालांकि, इन मांगों पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार का रुख तथा संबंधित कानूनी प्रक्रियाएं आगे की दिशा तय करेंगी।

बीजेपी ने विपक्ष के प्रदर्शन पर उठाए सवाल

विपक्ष के विरोध पर बीजेपी ने पलटवार किया है। पार्टी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के आंदोलन की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि अदालत में विचाराधीन मामले का फैसला सड़क पर प्रदर्शन के जरिए कैसे हो सकता है।

भंडारी ने विपक्ष के रुख को अलोकतांत्रिक बताया और कहा कि देश संविधान के अनुसार चलता है। बीजेपी की ओर से यह भी सवाल उठाया गया कि जब अदालत ने मामले में अगली तारीख निर्धारित कर रखी है, तो विरोध प्रदर्शन के जरिए दबाव बनाने का क्या औचित्य है।

फिलहाल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए समय मिलने और INDIA गठबंधन की बैठक में तय होने वाली रणनीति पर सबकी नजर है। यह भी देखना होगा कि विपक्ष की मांगों पर सरकार और चुनाव आयोग की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है तथा आंदोलन आगे किस रूप में जारी रहता है।

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