प्रसूता अंजलि सैनी की मौत को लेकर पिछले तीन दिनों से एमसीएच अस्पताल के बाहर चल रहा धरना शनिवार को प्रशासन और संघर्ष समिति के बीच हुई वार्ता के बाद समाप्त हो गया। सीकर सांसद कामरेड अमराराम की मौजूदगी में हुई बैठक में विभिन्न मांगों पर सहमति बनने के बाद आंदोलन खत्म करने की घोषणा की गई।
समझौते के तहत प्रशासन ने आश्वासन दिया कि जांच में यदि किसी चिकित्सक या अन्य स्वास्थ्यकर्मी की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार को मुआवजे का प्रस्ताव भेजा जाएगा। परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने पर भी सहमति बनी है। इसके अलावा संबंधित डॉक्टर को जांच पूरी होने तक नीमकाथाना में पदस्थापित नहीं रखने पर भी प्रशासन ने सहमति जताई।
धरना समाप्त होने के बाद सीकर सांसद कामरेड अमराराम ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं था, बल्कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया था। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि किसी भी चिकित्सक या कर्मचारी की लापरवाही साबित होती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
अमराराम ने उम्मीद जताई कि प्रशासन वार्ता के दौरान दिए गए सभी आश्वासनों को तय समय में पूरा करेगा। उन्होंने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि राजस्थान में प्रसूताओं की मौत के मामलों में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय है। उनके अनुसार सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों, संसाधनों और आवश्यक दवाइयों की कमी के कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने राज्य सरकार से सरकारी दवा आपूर्ति व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराने और अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार करने की मांग भी की।
