राजस्थान के दौसा जिले में एएनएम/एलएचवी संघ के आह्वान पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कुंडल में कार्यरत एएनएम कार्मिकों ने प्रसूता मृत्यु के मामलों में एएनएम को जिम्मेदार ठहराने संबंधी आदेशों का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के नाम ज्ञापन सौंपा।
एएनएम रजनी मेहरा और विमला जोनवाल ने बताया कि यह ज्ञापन सीएचसी प्रभारी डॉ. दयाराम गुर्जर को सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया कि एएनएम ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की पहली कड़ी हैं और वे निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को समय पर उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर करती हैं।
संघ का कहना है कि बिना निष्पक्ष जांच और तथ्यों के प्रसूता मृत्यु के लिए सीधे एएनएम को जिम्मेदार ठहराना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे स्वास्थ्यकर्मियों पर अनावश्यक मानसिक दबाव भी बन रहा है। प्रतिनिधियों ने कहा कि ऐसे आदेशों का असर एएनएम की कार्यप्रणाली और मनोबल पर पड़ रहा है।
ज्ञापन में विवादित आदेशों को तत्काल वापस लेने, एएनएम कार्मिकों के सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा भविष्य में इस प्रकार के आदेश जारी नहीं करने की मांग की गई है। संघ ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान एएनएम रजनी मेहरा, विमला जोनवाल, अनीता मीणा, मोनिका शर्मा, पूजा सहित सीएचसी कुंडल के अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी मौजूद रहे।
